हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.67.3

मंडल 6 → सूक्त 67 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 67
आ या॑तं मित्रावरुणा सुश॒स्त्युप॑ प्रि॒या नम॑सा हू॒यमा॑ना । सं याव॑प्नः॒स्थो अ॒पसे॑व॒ जना॑ञ्छ्रुधीय॒तश्चि॑द्यतथो महि॒त्वा ॥ (३)
हे मित्र और वरुण! शोभनवचन वाले स्तोत्रों एवं हव्यान्न द्वारा बुलाए हुए तुम दोनों आओ. कर्म का अधिकारी जिस प्रकार कर्म द्वारा अन्न चाहने वाले लोगों को वश में करता है, उसी प्रकार तुम अपने महत्त्व से ऐसे लोगों को वश में करो. (३)
Hey friend and Varun! Come, both of you, called by the hymns of adornment and the hyavin. Just as the possessor of karma subdues those who seek food through karma, so do you subdue such people by your importance. (3)