ऋग्वेद (मंडल 6)
ब्राह्म॑णासः॒ पित॑रः॒ सोम्या॑सः शि॒वे नो॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑ने॒हसा॑ । पू॒षा नः॑ पातु दुरि॒तादृ॑तावृधो॒ रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒घशं॑स ईशत ॥ (१०)
हे ब्राह्मणो, पितरो और यज्ञ को बढ़ाने वाले सोम तैयार करने वालो! हमारी रक्षा करो. पापरहित द्यावा-पृथिवी हमारा कल्याण करें. पूषा पाप से हमारी रक्षा करें. शत्रु हमारा स्वामी न बने. (१०)
O Brahmins, pitaros and those who make the soma who enhance the yajna! Protect us. May sinless god-earth do us good. God protect us from sin. Let the enemy not be our master. (10)