हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.75.11

मंडल 6 → सूक्त 75 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 75
सु॒प॒र्णं व॑स्ते मृ॒गो अ॑स्या॒ दन्तो॒ गोभिः॒ संन॑द्धा पतति॒ प्रसू॑ता । यत्रा॒ नरः॒ सं च॒ वि च॒ द्रव॑न्ति॒ तत्रा॒स्मभ्य॒मिष॑वः॒ शर्म॑ यंसन् ॥ (११)
बाण शोभनपंख धारण करता है. हिरण का सींग इसका दांत है. गाय से बनी तांत द्वारा बंधा हुआ बाण प्रेरणा के अनुसार लक्ष्य पर गिरता है. नेता जहां मिलकर या अलग-अलग घूमते हैं, वहां ये बाण हमें शरण दें. (११)
The arrow holds a sociable fan. The horn of the deer is its tooth. The arrow tied by a stem made of cow falls on the target according to the inspiration. Where leaders move together or separately, give us shelter there. (11)