ऋग्वेद (मंडल 6)
ती॒व्रान्घोषा॑न्कृण्वते॒ वृष॑पाण॒योऽश्वा॒ रथे॑भिः स॒ह वा॒जय॑न्तः । अ॒व॒क्राम॑न्तः॒ प्रप॑दैर॒मित्रा॑न्क्षि॒णन्ति॒ शत्रू॒ँरन॑पव्ययन्तः ॥ (७)
धूल उड़ाते हुए एवं रथों के साथ तेज दौड़ते हुए घोड़े जोर से हिनहिनाते हैं. वे युद्ध से न भागते हुए हिंसक शत्रुओं को अपनी टापों से कुचलते हैं. (७)
The horses, blowing dust and running briskly with chariots, wiggle loudly. They crush violent enemies with their toes without running away from war. (7)