हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.101.1

मंडल 7 → सूक्त 101 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 101
ति॒स्रो वाचः॒ प्र व॑द॒ ज्योति॑रग्रा॒ या ए॒तद्दु॒ह्रे म॑धुदो॒घमूधः॑ । स व॒त्सं कृ॒ण्वन्गर्भ॒मोष॑धीनां स॒द्यो जा॒तो वृ॑ष॒भो रो॑रवीति ॥ (१)
हे ऋषि! उन्हीं तीन वचनों को बोलो, जिनके अग्र भाग में ओम है एवं जो जल का दोहन करते हैं. पर्जन्य अपने साथ रहने वाली बिजलीरूपी अग्नि को उत्पन्न करते हैं एवं ओषधियों में गर्भ धारण करते हैं. वे शीघ्र उत्पन्न होकर बैल के समान बार-बार शब्द करते हैं. (१)
O sage! Speak the same three words, which have Om in their front and those who harness water. The parasites produce the electric agni that lives with them and conceive in the herbs. They are quick to arise and say words over and over again like bulls. (1)