ऋग्वेद (मंडल 7)
यो वर्ध॑न॒ ओष॑धीनां॒ यो अ॒पां यो विश्व॑स्य॒ जग॑तो दे॒व ईशे॑ । स त्रि॒धातु॑ शर॒णं शर्म॑ यंसत्त्रि॒वर्तु॒ ज्योतिः॑ स्वभि॒ष्ट्य१॒॑स्मे ॥ (२)
ओषधियों एवं जल को बढ़ाने वाले तथा सारे संसार के स्वामी पर्जन्य तीन प्रकार की भूमियों से युक्त घर एवं सुख प्रदान करें. पर्जन्य हमें तीन ऋतुओं में रहने वाली शोभन ज्योति दे. (२)
Provide homes and happiness with three types of lands that enhance the herbs and water and the masters of the whole world. Give us the shobhan jyoti that lives in three seasons. (2)