हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.104.16

मंडल 7 → सूक्त 104 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 104
यो माया॑तुं॒ यातु॑धा॒नेत्याह॒ यो वा॑ र॒क्षाः शुचि॑र॒स्मीत्याह॑ । इन्द्र॒स्तं ह॑न्तु मह॒ता व॒धेन॒ विश्व॑स्य ज॒न्तोर॑ध॒मस्प॑दीष्ट ॥ (१६)
जो राक्षस मुझ अराक्षस को राक्षस कहता है एवं स्वयं को पवित्र बतलाता है, उसे इंद्र अपने महान्‌ आयुधों द्वारा नष्ट कर दें. वह सभी प्राणियों की अपेक्षा अधम बनें. (१६)
Let indra destroy the demon who calls me araakshas a demon and sanctifies himself. He should be inferior to all beings. (16)