ऋग्वेद (मंडल 7)
प्र या जिगा॑ति ख॒र्गले॑व॒ नक्त॒मप॑ द्रु॒हा त॒न्वं१॒॑ गूह॑माना । व॒व्राँ अ॑न॒न्ताँ अव॒ सा प॑दीष्ट॒ ग्रावा॑णो घ्नन्तु र॒क्षस॑ उप॒ब्दैः ॥ (१७)
जो राक्षस रात के समय उल्लू के समान अपना शरीर छिपाकर चलता है, वह नीचे को मुंह करके गहरे गड्ढे में गिरे. सोमरस कुचलने के पत्थर भी अपने शब्दों से उसे नष्ट करें. (१७)
The monster who hides his body like an owl at night, he fell into the deep pit by mouthing down. The stones of crushing the somras also destroy him with his words. (17)