हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.16.1

मंडल 7 → सूक्त 16 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
ए॒ना वो॑ अ॒ग्निं नम॑सो॒र्जो नपा॑त॒मा हु॑वे । प्रि॒यं चेति॑ष्ठमर॒तिं स्व॑ध्व॒रं विश्व॑स्य दू॒तम॒मृत॑म् ॥ (१)
हे यजमान! मैं शक्तिपुत्र, प्रियः अतिशय ज्ञानशील, गतिशील, शोभनयज्ञ वाले, सबके दूत और मरणरहित अग्नि को इस स्तुति द्वारा तुम्हारे कल्याण के लिए बुलाता हूं. (१)
O host! I call the son of power, dear: the most knowledgeable, the dynamic, the godly, the dominionist, the messenger of all, and the agni without death, for your welfare through this praise. (1)