हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.16.2

मंडल 7 → सूक्त 16 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
स यो॑जते अरु॒षा वि॒श्वभो॑जसा॒ स दु॑द्रव॒त्स्वा॑हुतः । सु॒ब्रह्मा॑ य॒ज्ञः सु॒शमी॒ वसू॑नां दे॒वं राधो॒ जना॑नाम् ॥ (२)
प्रकाशयुक्त एवं सबके पालक अग्नि अपने रथ में घोड़ों को जोतते हैं एवं शीघ्रता से देवों के पास जाते हैं. हे भली प्रकार बुलाए गए एवं शोभनस्तुति वाले अग्नि! तुम यज्ञरूप एवं शोभनकर्म वाले हो. वसिष्ठगोत्रीय ऋषि का हवि अग्नि के पास जाए. (२)
The lighted and the guardian of all, the agni, ploughs the horses in their chariots and quickly goes to the gods. O agnis of well-called and adorned! You are a yajnarup and a shobhankarma. The havan of Vasishthagotriya rishi should go to the agni. (2)