हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.34.12

मंडल 7 → सूक्त 34 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
अवि॑ष्टो अ॒स्मान्विश्वा॑सु वि॒क्ष्वद्युं॑ कृणोत॒ शंसं॑ निनि॒त्सोः ॥ (१२)
हे देवो! समस्त प्रजाओं में हमारी रक्षा करो एवं हमारी निंदा के इच्छुक व्यक्ति को तेजहीन बनाओ. (१२)
Oh, God! Protect us among all the people and make the one who wants to condemn us sharply. (12)