ऋग्वेद (मंडल 7)
व्ये॑तु दि॒द्युद्द्वि॒षामशे॑वा यु॒योत॒ विष्व॒ग्रप॑स्त॒नूना॑म् ॥ (१३)
शत्रुओं के असुखकारी आयुध सब ओर हट जावें. हे देवो! शरीर का पाप हमसे दूर करो. (१३)
Let the enemies' unfriendly weapons be removed everywhere. Oh, God! Take away from us the sin of the flesh. (13)