हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.34.3

मंडल 7 → सूक्त 34 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
आप॑श्चिदस्मै॒ पिन्व॑न्त पृ॒थ्वीर्वृ॒त्रेषु॒ शूरा॒ मंस॑न्त उ॒ग्राः ॥ (३)
विस्तृत जल इन इंद्र को तृप्त करते हैं. शत्रुबाधा होने पर उग्र एवं शूर लोग इंद्र की स्तुति करते हैं. (३)
The wide water satisfies these indras. When they are armed with enemies, the fierce and brave people praise Indra. (3)