हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.34.5

मंडल 7 → सूक्त 34 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
अ॒भि प्र स्था॒ताहे॑व य॒ज्ञं याते॑व॒ पत्म॒न्त्मना॑ हिनोत ॥ (५)
हे मनुष्यो! यज्ञ के सामने जाओ एवं यात्री के समान यज्ञमार्ग पर स्वयं ही चलो. (५)
O men! Go in front of the yajna and walk on the path of yajna yourself like a traveler. (5)