ऋग्वेद (मंडल 7)
अ॒भि स्व॒पूभि॑र्मि॒थो व॑पन्त॒ वात॑स्वनसः श्ये॒ना अ॑स्पृध्रन् ॥ (३)
मरुत् अपने संचरणों के द्वारा आपस में मिलते हैं. ये हवा के समान तेज उड़ने वाले बाजों के समान आपस में स्पर्धा करते हैं. (३)
The deserts meet through their transmissions. They compete among themselves like hawks flying as fast as the wind. (3)