हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.56.4

मंडल 7 → सूक्त 56 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 56
ए॒तानि॒ धीरो॑ नि॒ण्या चि॑केत॒ पृश्नि॒र्यदूधो॑ म॒ही ज॒भार॑ ॥ (४)
धीर व्यक्ति इन सर्वांगश्वेत मरुतों को जानते हैं. पृश्नि ने इन्हें अंतरिक्ष में धारण किया था. (४)
Patient people know these omnipotent maruts. The earth held them in space. (4)