ऋग्वेद (मंडल 7)
यद॒द्य सू॑र्य॒ ब्रवोऽना॑गा उ॒द्यन्मि॒त्राय॒ वरु॑णाय स॒त्यम् । व॒यं दे॑व॒त्रादि॑ते स्याम॒ तव॑ प्रि॒यासो॑ अर्यमन्गृ॒णन्तः॑ ॥ (१)
हे सूर्य देव! आज उदय होते हुए तुम यदि हमें सब देवों के मध्य पापरहित कहो तो हे दीनतारहित सूर्य! हम मित्र व वरुण के लिए वास्तव में निष्पाप हो जाएंगे. हे अर्यमा! हम तुम्हारी स्तुति करते हुए सबके प्रिय हों. (१)
O Sun God! Today, as you rise, if you call us sinless among all gods, o sun without humbleness! We will be really useless to the friend and Varun. O Aryama! May we praise you and be dear to all. (1)