हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.66.3

मंडल 7 → सूक्त 66 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
ता नः॑ स्ति॒पा त॑नू॒पा वरु॑ण जरितॄ॒णाम् । मित्र॑ सा॒धय॑तं॒ धियः॑ ॥ (३)
वे दोनों हमारे घर एवं शरीर के रक्षक हैं. हे मित्र व वरुण! तुम स्तोताओं के स्तुतिरूप कर्म को पूरा करो. (३)
They are both the protectors of our home and body. Oh my friend and Varun! You complete the deeds as a token of praise to the psalms. (3)