ऋग्वेद (मंडल 7)
उपो॑ रुरुचे युव॒तिर्न योषा॒ विश्वं॑ जी॒वं प्र॑सु॒वन्ती॑ च॒रायै॑ । अभू॑द॒ग्निः स॒मिधे॒ मानु॑षाणा॒मक॒र्ज्योति॒र्बाध॑माना॒ तमां॑सि ॥ (१)
यौवनप्राप्त नारी के समान उषा समस्त जीवों को संचार के लिए प्रेरित करती हुई सूर्य के पास प्रकाशित होती है. अग्नि मनुष्यों द्वारा प्रज्वलित करने योग्य हुए हैं एवं अंधकार मिटाने वाला प्रकाश फैलाते हैं. (१)
Like a young woman, Usha is illuminated near the sun, inspiring all living beings to communicate. Fire has been ignited by humans and spreads light that erases darkness. (1)