हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.77.2

मंडल 7 → सूक्त 77 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 77
विश्वं॑ प्रती॒ची स॒प्रथा॒ उद॑स्था॒द्रुश॒द्वासो॒ बिभ्र॑ती शु॒क्रम॑श्वैत् । हिर॑ण्यवर्णा सु॒दृशी॑कसंदृ॒ग्गवां॑ मा॒ता ने॒त्र्यह्ना॑मरोचि ॥ (२)
सब ओर से सुडौल उषा सबके सामने उदित है एवं उज्ज्वल तेज को धारण करके बढ़ रही है. सुनहरे रंग वाली, देखने योग्य तेज वाली, वाणियों की माता एवं दिनों की नेत्री उषा सुशोभित है. (२)
From all sides, the curvy Usha is rising in front of everyone and is growing up by holding on to the bright fast. The golden-coloured, the seeable, the bright, the mother of the vanis and the leader of the day, Usha, is adorned. (2)