हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.87.4

मंडल 7 → सूक्त 87 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 87
उ॒वाच॑ मे॒ वरु॑णो॒ मेधि॑राय॒ त्रिः स॒प्त नामाघ्न्या॑ बिभर्ति । वि॒द्वान्प॒दस्य॒ गुह्या॒ न वो॑चद्यु॒गाय॒ विप्र॒ उप॑राय॒ शिक्ष॑न् ॥ (४)
वरुण ने मुझ मेधावी से कहा था कि धरती इक्कीस नाम धारण करती है. विद्वान्‌ एवं मेधावी वरुण ने मुझ अंतेवासी को उपदेश देते हुए ब्रहमलोक की गुप्त बातों को भी बताया है. (४)
Varun had told me that the earth bears twenty-one names. The scholarly and brilliant Varuna has also told me the secret things of Brahmaloka while preaching to the antewasi. (4)