हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.17.12

मंडल 8 → सूक्त 17 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
शाचि॑गो॒ शाचि॑पूजना॒यं रणा॑य ते सु॒तः । आख॑ण्डल॒ प्र हू॑यसे ॥ (१२)
हे शक्तिशाली, गायों के स्वामी एवं प्रसिद्ध पूजन वाले इंद्र! तुम्हारी प्रसन्नता के लिए यह सोमरस निचोड़ा गया है. हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम स्तुतियों द्वारा बुलाए जाते हो. (१२)
O mighty, lord of cows and the famous worshiper Indra! This sommerus has been squeezed for your delight. O enemies Indra! You are called by praises. (12)