हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.18.17

मंडल 8 → सूक्त 18 → श्लोक 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
ते नो॑ भ॒द्रेण॒ शर्म॑णा यु॒ष्माकं॑ ना॒वा व॑सवः । अति॒ विश्वा॑नि दुरि॒ता पि॑पर्तन ॥ (१७)
हे निवासदाता आदित्यो! अपनी कल्याणकारी एवं सुखद नाव के द्वारा हमें सब पापों के पार पहुंचाओ. (१७)
O abode aditya! Bring us across all sins through your welfare and pleasant boat. (17)