हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.19.27

मंडल 8 → सूक्त 19 → श्लोक 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 19
पि॒तुर्न पु॒त्रः सुभृ॑तो दुरो॒ण आ दे॒वाँ ए॑तु॒ प्र णो॑ ह॒विः ॥ (२७)
भली प्रकार भरणकर्ता अग्नि हमारे यज्ञगृह में हमारा हवि देवों को इस प्रकार पहुंचावें जिस प्रकार पुत्र पिता की सेवा करता है. (२७)
May the well-to-do agni deliver our happiness to the gods in our sacrificial house in such a way that the Son serves the Father. (27)