ऋग्वेद (मंडल 8)
श्रु॒ष्ट्य॑ग्ने॒ नव॑स्य मे॒ स्तोम॑स्य वीर विश्पते । नि मा॒यिन॒स्तपु॑षा र॒क्षसो॑ दह ॥ (१४)
हे वीर एवं प्रजापालक अग्नि! हमारी नवीन स्तुतियों को सुनो एवं अपने ताप वाले तेज से मायावी राक्षसों को जलाओ. (१४)
O heroic and sovereign agni! Listen to our new praises and burn the elusive monsters with your warmth. (14)