हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.23.15

मंडल 8 → सूक्त 23 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
न तस्य॑ मा॒यया॑ च॒न रि॒पुरी॑शीत॒ मर्त्यः॑ । यो अ॒ग्नये॑ द॒दाश॑ ह॒व्यदा॑तिभिः ॥ (१५)
शत्रु लोग माया द्वारा भी उसे वश में नहीं कर सकते, जो हव्यदाता ऋत्विजों द्वारा अग्नि को हवि देता है. (१५)
The enemy people cannot subdue him even by maya, who gives agni to him by the evil-giving rituals. (15)