हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.25.2

मंडल 8 → सूक्त 25 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
मि॒त्रा तना॒ न र॒थ्या॒३॒॑ वरु॑णो॒ यश्च॑ सु॒क्रतुः॑ । स॒नात्सु॑जा॒ता तन॑या धृ॒तव्र॑ता ॥ (२)
शोभन-यज्ञकर्म वाले मित्र व वरुण धन एवं रथ के स्वामी हैं. वे बहुत समय पूर्व शोभन जन्म वाले, अदितिपुत्र एवं व्रतधारी हैं. (२)
The friends of Shobhan-Yajnakarma and Varuna are the masters of wealth and chariots. He is a long time ago, born shobhan, aditiputra and vratdhari. (2)