ऋग्वेद (मंडल 8)
वि॒शां राजा॑न॒मद्भु॑त॒मध्य॑क्षं॒ धर्म॑णामि॒मम् । अ॒ग्निमी॑ळे॒ स उ॑ श्रवत् ॥ (२४)
मैं प्रजाओं के राजा, अद्भुत एवं यज्ञकर्मो के अध्यक्ष अग्नि की स्तुति करता हूं. वे मेरी स्तुति सुनें. (२४)
I praise agni, the king of the people, the master of the wonderful and the yagnakarmos. They hear my praise. (24)