ऋग्वेद (मंडल 8)
अ॒ग्निं वि॒श्वायु॑वेपसं॒ मर्यं॒ न वा॒जिनं॑ हि॒तम् । सप्तिं॒ न वा॑जयामसि ॥ (२५)
हम सर्वगत-शक्ति वाले, बलशाली एवं मानवों के समान सबके हितकारी अग्नि को अपनी स्तुतियों द्वारा अश्व के समान शक्तिशाली बनाते हैं. (२५)
We make the all-powerful, powerful, and human-benevolent agni as powerful as a horse through our praises. (25)