हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.43.26

मंडल 8 → सूक्त 43 → श्लोक 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
घ्नन्मृ॒ध्राण्यप॒ द्विषो॒ दह॒न्रक्षां॑सि वि॒श्वहा॑ । अग्ने॑ ति॒ग्मेन॑ दीदिहि ॥ (२६)
हे अग्नि! तुम हिंसकों और द्वेषियों को नष्ट करते हुए एवं राक्षसों को जलाते हुए तीक्ष्ण तेज के द्वारा दीप्त बनो. (२६)
O agni! Be overwhelmed by the sharp intensity, destroying the violent and the malice and burning the demons. (26)