ऋग्वेद (मंडल 8)
यं त्वा॒ जना॑स इन्ध॒ते म॑नु॒ष्वद॑ङ्गिरस्तम । अग्ने॒ स बो॑धि मे॒ वचः॑ ॥ (२७)
हे अंगिराओं में श्रेष्ठ अग्नि! तुम्हें जिस प्रकार मनु ने प्रज्वलित किया था, उसी प्रकार ये लोग जलाते हैं. तुम मेरी स्तुति जानो. (२७)
O the great agni in the Angiras! Just as Manu ignited you, so do these people burn. You know my praise. (27)