हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.11

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
आ नो॑ अग्ने वयो॒वृधं॑ र॒यिं पा॑वक॒ शंस्य॑म् । रास्वा॑ च न उपमाते पुरु॒स्पृहं॒ सुनी॑ती॒ स्वय॑शस्तरम् ॥ (११)
हे पवित्र करने वाले अग्नि! हमें अन्न बढ़ाने वाला एवं प्रशंसनीय धन दो. हे समीपवर्ती एवं संपत्तिरूप अग्नि! हमें अपने शोभन नेतृत्व द्वारा ऐसा धन दो जो बहुतों द्वारा चाहने योग्य एवं अतिशय कीर्ति देने वाला हो. (११)
O holy agni! Give us food-enhancing and praiseworthy money. O nearby and property-like agni! Give us money through your shobhan leadership that is desirable and very prestigious by many. (11)