हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.12

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
येन॒ वंसा॑म॒ पृत॑नासु॒ शर्ध॑त॒स्तर॑न्तो अ॒र्य आ॒दिशः॑ । स त्वं नो॑ वर्ध॒ प्रय॑सा शचीवसो॒ जिन्वा॒ धियो॑ वसु॒विदः॑ ॥ (१२)
हे अग्नि! हमें वह धन दो, जिसकी सहायता से हम युद्ध में वेगशाली शत्रुओं एवं शस्त्र फेंकने वालों को जीतें एवं उन्हें मारें. हे बुद्धि द्वारा निवासस्थान देने वाले अग्नि! हमें बढ़ाओ एवं हमारे धन देने वाले यज्ञों को पूरा करो. (१२)
O agni! Give us the money with the help of which we win and kill the strong enemies and weapons throwers in the war. O agni that gives you the place of residence by wisdom! Increase us and complete our money-giving sacrifices. (12)