हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.13

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
शिशा॑नो वृष॒भो य॑था॒ग्निः श‍ृङ्गे॒ दवि॑ध्वत् । ति॒ग्मा अ॑स्य॒ हन॑वो॒ न प्र॑ति॒धृषे॑ सु॒जम्भः॒ सह॑सो य॒हुः ॥ (१३)
अग्नि बैल के समान अपने सींग बढ़ाते हुए ज्वालाओं को कंपित करते हैं. अग्नि की ठोड़ीरूपी ज्वालाएं तीखी हैं. इन्हें कोई रोक नहीं सकता. बलपुत्र अग्नि के दांत शोभन हैं. (१३)
Fire staggers the flames while extending their horns like bulls. The flames of the chin of agni are sharp. No one can stop them. The teeth of Balputra Agni are Shobhan. (13)