हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.17

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
अ॒ग्निम॑ग्निं वो॒ अध्रि॑गुं हु॒वेम॑ वृ॒क्तब॑र्हिषः । अ॒ग्निं हि॒तप्र॑यसः शश्व॒तीष्वा होता॑रं चर्षणी॒नाम् ॥ (१७)
हे यजमानो! कुश छिन्न करने वाले एवं हव्य डालने वाले हम तुम्हारे लिए अग्नि को बुलाते हैं. अग्नि सर्वदा घर में वर्तमान, होता एवं सब प्रजाओं के यज्ञकर्मो को धारण करने वाले हैं. (१७)
O hosts! We, who break the kush and remove the lust, call agni for you. Fire is always present in the house, and he is going to wear the sacrifice of all the subjects. (17)