हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.18

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
केते॑न॒ शर्म॑न्सचते सुषा॒मण्यग्ने॒ तुभ्यं॑ चिकि॒त्वना॑ । इ॒ष॒ण्यया॑ नः पुरु॒रूप॒मा भ॑र॒ वाजं॒ नेदि॑ष्ठमू॒तये॑ ॥ (१८)
हे अग्नि! यजमान शोभन सामवेद वाले एवं सुखसाधन यज्ञ में बुद्धिमान्‌ मनुष्यों से मिलकर स्तुतियों द्वारा प्रशंसा करते हैं. तुम हमारी रक्षा के लिए अपनी इच्छा से समीप में वर्तमान एवं अनेक रूपों वाले अन्न लाओ. (१८)
O agni! The host shobhan samaveda wale and sukhsadhan yagya meet intelligent human beings and praise them with praises. You bring present and many forms of food nearby with your own will to protect us. (18)