हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.54.4

मंडल 8 → सूक्त 54 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
आ त॑ इन्द्र महि॒मानं॒ हर॑यो देव ते॒ महः॑ । रथे॑ वहन्तु॒ बिभ्र॑तः ॥ (४)
हे इंद्र! रथ में जुड़े हुए घोड़े तुम्हारे महत्त्व को तेज करके भली प्रकार वहन करें. (४)
O Indra! May the horses attached in the chariot accelerate your importance and bear it well. (4)