हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.54.5

मंडल 8 → सूक्त 54 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
इन्द्र॑ गृणी॒ष उ॑ स्तु॒षे म॒हाँ उ॒ग्र ई॑शान॒कृत् । एहि॑ नः सु॒तं पिब॑ ॥ (५)
हे महान्‌, उग्र एवं ऐश्वर्यकारी इंद्र! लोगों द्वारा तुमसे याचना की जाती है एवं तुम्हारी स्तुति की जाती है. आकर हमारा सोमरस पिओ. (५)
O great, fierce and glorious Indra! People beg of you and you are praised. Come and drink our somras. (5)