ऋग्वेद (मंडल 8)
ज॒ज्ञा॒नो नु श॒तक्र॑तु॒र्वि पृ॑च्छ॒दिति॑ मा॒तर॑म् । क उ॒ग्राः के ह॑ शृण्विरे ॥ (१)
शतक्रतु इंद्र ने जन्म लेते ही अपनी माता से पूछा-“कोन उग्र एवं कौन प्रसिद्ध है?” (१)
As soon as He was born, Shatrattu Indra asked his mother, "Who is angry and famous?" (1)
ऋग्वेद (मंडल 8)
आदीं॑ शव॒स्य॑ब्रवीदौर्णवा॒भम॑ही॒शुव॑म् । ते पु॑त्र सन्तु नि॒ष्टुरः॑ ॥ (२)
इंद्र की माता शवसी ने तभी कहा-“ऊर्णनाभ, अहीशुव आदि अनेक असुर हैं. तुम उन्हें समाप्त करो.” (२)
Indra's mother Shavasi said, "There are many asuras like Urnabha, Ahishuva, etc. You finish them." (2)
ऋग्वेद (मंडल 8)
समित्तान्वृ॑त्र॒हाखि॑द॒त्खे अ॒राँ इ॑व॒ खेद॑या । प्रवृ॑द्धो दस्यु॒हाभ॑वत् ॥ (३)
वृत्रनाशक इंद्र ने उन्हें एक साथ इस प्रकार खींचा जिस प्रकार रस्सी से चक्र के अरे खींचे जाते हैं. इंद्र दस्युजनों को मारकर बढ़े. (३)
The vrittle Indra pulled them together in such a way as the rope pulls the wheels of the chakra. Indra grew up killing the bandits. (3)
ऋग्वेद (मंडल 8)
एक॑या प्रति॒धापि॑बत्सा॒कं सरां॑सि त्रिं॒शत॑म् । इन्द्रः॒ सोम॑स्य काणु॒का ॥ (४)
इंद्र ने एक साथ ही सोमरस से भरे हुए तीन सुंदर उवथ मंत्रों को पी लिया. (४)
Indra drank three beautiful uwath mantras filled with somras at the same time. (4)
ऋग्वेद (मंडल 8)
अ॒भि ग॑न्ध॒र्वम॑तृणदबु॒ध्नेषु॒ रज॒स्स्वा । इन्द्रो॑ ब्र॒ह्मभ्य॒ इद्वृ॒धे ॥ (५)
इंद्र ने ब्राह्मणों की वृद्धि के लिए आधाररहित अंतरिक्ष में मेघ को सब ओर से मारा. (५)
Indra hit the cloud from all sides in the baseless space for the growth of the Brahmins. (5)
ऋग्वेद (मंडल 8)
निरा॑विध्यद्गि॒रिभ्य॒ आ धा॒रय॑त्प॒क्वमो॑द॒नम् । इन्द्रो॑ बु॒न्दं स्वा॑ततम् ॥ (६)
इंद्र ने मनुष्यों के लिए पके हुए अन्न का निर्माण करने के लिए बड़ा सा बाण लेकर बादल को छेदा. (६)
Indra pierced the cloud with a large arrow to make cooked food for humans. (6)
ऋग्वेद (मंडल 8)
श॒तब्र॑ध्न॒ इषु॒स्तव॑ स॒हस्र॑पर्ण॒ एक॒ इत् । यमि॑न्द्र चकृ॒षे युज॑म् ॥ (७)
हे इंद्र! तुम युद्ध में जिस एकमात्र बाण की सहायता लेते हो, उस में आगे फलक हैं एवं पीछे हजार पंख हैं. (७)
O Indra! The only arrow you take the help of in battle has a front face and a thousand wings behind it. (7)
ऋग्वेद (मंडल 8)
तेन॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र॒ नृभ्यो॒ नारि॑भ्यो॒ अत्त॑वे । स॒द्यो जा॒त ऋ॑भुष्ठिर ॥ (८)
हे इंद्र! हम स्तोताओं, हमारे पुत्रों और हमारी नगरियों के भोग के लिए उसी बाण की सहायता से पर्याप्त धन ले आओ. तुम जन्म के समय ही विशाल एवं स्थिर थे. (८)
O Indra! We bring enough money with the help of the same arrow for the enjoyment of the Stotas, our sons and our cities. You were huge and stable at birth. (8)