ऋग्वेद (मंडल 8)
श॒तब्र॑ध्न॒ इषु॒स्तव॑ स॒हस्र॑पर्ण॒ एक॒ इत् । यमि॑न्द्र चकृ॒षे युज॑म् ॥ (७)
हे इंद्र! तुम युद्ध में जिस एकमात्र बाण की सहायता लेते हो, उस में आगे फलक हैं एवं पीछे हजार पंख हैं. (७)
O Indra! The only arrow you take the help of in battle has a front face and a thousand wings behind it. (7)