हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.66.6

मंडल 8 → सूक्त 66 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
निरा॑विध्यद्गि॒रिभ्य॒ आ धा॒रय॑त्प॒क्वमो॑द॒नम् । इन्द्रो॑ बु॒न्दं स्वा॑ततम् ॥ (६)
इंद्र ने मनुष्यों के लिए पके हुए अन्न का निर्माण करने के लिए बड़ा सा बाण लेकर बादल को छेदा. (६)
Indra pierced the cloud with a large arrow to make cooked food for humans. (6)