हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.1

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
उद्घेद॒भि श्रु॒ताम॑घं वृष॒भं नर्या॑पसम् । अस्ता॑रमेषि सूर्य ॥ (१)
हे शोभन वीर्य वाले इंद्र! तुम प्रसिद्ध धन वाले, अभिलाषापूरक, मानवहितैषी एवं दाता यजमान के चारों ओर जाते हो. (१)
O Indra with shobhan semen! You go around the famous rich, pro-people, pro-people, human-friendly and donor host. (1)