ऋग्वेद (मंडल 8)
अधा॑ ते॒ अप्र॑तिष्कुतं दे॒वी शुष्मं॑ सपर्यतः । उ॒भे सु॑शिप्र॒ रोद॑सी ॥ (१२)
हे शोभन-टोप वाले इंद्र! दीप्तियुक्त द्यावा-पृथिवी तुम्हारे अबाध बल की पूजा करती हैं. (१२)
O lord-of-the-box Indra! The bright dyava-prithvivi worships your uninterrupted force. (12)