हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.25

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
तुभ्यं॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे स्ती॒र्णं ब॒र्हिर्वि॑भावसो । स्तो॒तृभ्य॒ इन्द्र॒मा व॑ह ॥ (२५)
हे दीप्तिशाली धन वाले अग्नि! तुम्हारे लिए ही ये सोम निचोड़े गए हैं एवं कुश बिछाए गए हैं. हम पर कृपा के निमित्त इंद्र को सोमरस पीने के लिए बुलाओ. (२५)
O agni with great wealth! It is for you that these mons have been squeezed and kush laid. Call Indra to drink somras for the sake of grace on us. (25)