हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.32

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
द्वि॒ता यो वृ॑त्र॒हन्त॑मो वि॒द इन्द्रः॑ श॒तक्र॑तुः । उप॑ नो॒ हरि॑भिः सु॒तम् ॥ (३२)
शतक्रतु एवं शन्रुहंताओं में शरेष्ठ इंद्र दो प्रकार से जाने जाते हैं. हे इंद्र! हरि नामक घोड़ों की सहायता से हमारे द्वारा निचोड़े हुए सोम के समीप आओ. (३२)
In the Shatrattu and Shanruhantas, the sharishta Indra is known in two ways. O Indra! Come near the som we have squeezed with the help of horses named Hari. (32)