हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.33

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
त्वं हि वृ॑त्रहन्नेषां पा॒ता सोमा॑ना॒मसि॑ । उप॑ नो॒ हरि॑भिः सु॒तम् ॥ (३३)
हे वृत्रहंता इंद्र! तुम सोमरस पीने वाले हो, इसलिए हमारे द्वारा निचोड़े हुए सोमरस के पास हरि नामक घोड़ों की सहायता से आओ. (३३)
O Vrithrahanta Indra! You are the drinker of somras, so come to the somras that we have squeezed with the help of horses called Hari. (33)