हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.4

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
यद॒द्य कच्च॑ वृत्रहन्नु॒दगा॑ अ॒भि सू॑र्य । सर्वं॒ तदि॑न्द्र ते॒ वशे॑ ॥ (४)
हे वृत्रहंता एवं सूर्यरूपी इंद्र! इस समय विश्व में जो भी पदार्थ हैं, तुम उनके सामने उदित हुए हो एवं सारा विश्व तुम्हारे वश में है. (४)
O Vrithrahanta and Indra in the form of sun! Whatever substances are in the world at this time, you have risen before them and the whole world is under your control. (4)