हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.5

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
यद्वा॑ प्रवृद्ध सत्पते॒ न म॑रा॒ इति॒ मन्य॑से । उ॒तो तत्स॒त्यमित्तव॑ ॥ (५)
हे वृद्धिप्राप्त एवं सज्जनपालक इंद्र! तुम अपने को जो मरणरहित मानते हो, वह सत्य है. (५)
O the rising and the gentleman Indra! What you consider yourself to be without death is the truth. (5)