हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.83.2

मंडल 8 → सूक्त 83 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 83
यस्या॑ दे॒वा उ॒पस्थे॑ व्र॒ता विश्वे॑ धा॒रय॑न्ते । सूर्या॒मासा॑ दृ॒शे कम् ॥ (२)
सभी देव पृश्नि की गोद में रहकर व्रत धारण करते हैं. सूर्य एवं चंद्रमा उसके समीप सुख से रहते हैं. (२)
All the gods observe fast in the lap of the earth. The sun and the moon live happily near it. (2)