ऋग्वेद (मंडल 8)
स सु॒क्रतू॒ रणि॑ता॒ यः सु॒तेष्वनु॑त्तमन्यु॒र्यो अहे॑व रे॒वान् । य एक॒ इन्नर्यपां॑सि॒ कर्ता॒ स वृ॑त्र॒हा प्रतीद॒न्यमा॑हुः ॥ (१९)
इंद्र शोभन बुद्धि वाले, निचोड़े हुए सोम से प्रसन्न होने वाले शत्रुओं द्वारा अविनकष्ट क्रोध वाले, दिन के समान धनयुक्त, बिना किसी की सहायता से मानवहितकारी कर्म करने वाले, शत्रुनाशक एवं शन्रुसमूह के विरोधी हैं. (१९)
Indra is a man of good intellect, with unconfirmed anger by enemies who are happy with the squeezed soma, rich as day, doing human-beneficial deeds without the help of anyone, enemies and enemies of the shanru group. (19)